आज के युवाओं की सोच और भाव से जो अवगत हैं वो समझ सकते हैं कि यह जीवन का ऐसा पड़ाव है जिसमें वह कठिनाइभरे चमत्कारी सालो में केवल हंसी मजाक और आशावाद का ही सहारा होता है।
ऐसे में यह जानना आवश्यक हैं कि
जो भी कुछ हम सुनते हैं वे विचार होते हैं, तथ्य नहीं।
हम जो कुछ देखते हैं वह एक परिप्रेक्ष्य है, सत्य नहीं
अगर सही नहीं लगता तो करो मत
अगर सच नहीं हैं तो कहो मत
बेहतरीन इंसान सिर्फ और सिर्फ अपने कर्म से पहचाने जाते हैं।
क्योंकि अच्छी बातें तो बुरे लोग भी कर लेते है।